सावधान: पार्टनर की ये बातें ला सकती है रिश्ते में खटास

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पति-पत्नी का रिश्ता! कभी बर्फ का तो कभी आग का। कभी खुशी का तो कभी गम का।लेकिन इस रिश्ते की डोर बड़ी मजबूत होती है।भरोसे से गूंथी हुई और प्यार में भीगी हुई यह डोर कभी पुरानी नहीं हो सकती, अगर आप दिल की बात दिल तक पहुंचाने की आदत डाल लें। आइए जानते हैं कैसे। #सावधान: पार्टनर की ये बातें ला सकती है रिश्ते में खटास

रहीम का बहुत प्रसिद्ध दोहा है-
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय॥
 

अर्थात प्रेम के धागे को कभी तोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि यदि यह एक बार टूट जाता है, तो फिर दुबारा नहीं जुड़ता और जुड़ता भी है, तो इसमें गांठ पड़ी रह जाती है। यदि यह धागा नई-नई शादी का हो तो इसके टूटने या इसमें गांठ पड़ने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं, क्योंकि आरंभ में यह थोड़ा कच्चा होता है। रिश्ते की गांठें भले ही बाहर नजर न आएं, मगर मन में तो पड़ी ही रह जाती हैं, जो पूरी उम्र सालती रहती हैं।

आपकी समझदारी से नए-नवेले दांपत्य का यह कच्चा, कुनकुना-सा रिश्ता ‘मेड फॉर इच अदर’ की फीलिंग में बदल सकता है। यदि आप भी ऐसे ही सुखी रिश्ते की नींव डालना चाहती हैं, तो आपको आत्मविश्लेषण कर विवाह के आरंभिक दिनों से ही कुछ आदतों को छोड़ना होगा।

कई बार हमारी कुछ ऐसी आदतें होती हैं, जो अच्छे-भले रिश्ते में गांठ डालने का काम करती हैं। यदि आप इनमें से किसी की शिकार हैं, तो वक्त रहते संभल जाएं और अपने प्यार की बगिया को बिखरने से बचा लें।

जल्दी घर आने का दबाव
रोहित एक आईटी इंजीनियर है।नई-नई शादी और रोमांटिक हनीमून वेकेशन के बाद जब वापस ऑफिस ज्वाइन किया तो देखा, मंदी के इस दौर में उसके कुछ सहकर्मी अपनी नौकरी खो चुके थे। इस कारण वह बेहद मानसिक दबाव में आ गया और नौकरी बचाने के लिए देर तक ऑफिस में रुककर अतिरिक्त काम करने लगा। मगर उसकी नवविवाहिता सौम्या उसकी मानसिक स्थिति को अनदेखा कर शाम होते ही बार-बार उसे फोन कर परेशान करना शुरू कर देती और उल्टे सीधे ताने मारने लगती।जैसे ‘सारा दिन ऑफिस में बैठे रहते हो, तुम्हें तो मेरी कोई चिंता ही नहीं… तुम तो मुझसे अभी से दूर भागने लगे हो….।’ सौम्या की ऐसी बेसिर-पैर की बातें रोहित के स्ट्रेस को और बढ़ा रही थीं, फलस्वरूप वह सच में सौम्या से दूर होता चला गया। उसने सौम्या के फोन ही अटेंड करने बंद कर दिए। जरा सोचिए, कहीं आप सौम्या जैसी मानसिकता रख स्वयं अपनी शादी को बर्बाद तो नहीं कर रही हैं।
खाने के साथ शिकायतें परोसना
कुछ पत्नियों की आदत होती है कि वे खाना तो बड़े प्यार से बनाती हैं, मगर डाइनिंग टेबल पर खाने के साथ दिन भर की शिकायतें और भलाई-बुराई भी परोस डालती हैं, जिससे पति का सारा मूड खराब हो जाता है। ऊपर से पत्नी यह भी चाहती है कि पति उसके बनाए भोजन की तारीफ करे। अब बेचारा पति तारीफ कैसे करेगा, क्योंकि आपने उसे खाने का स्वाद ही कहां लेने दिया? आयुर्वेद कहता है कि वही अन्न हमारे शरीर के लिए हितकारी होता है, जिसको हम शांति से खा पाएं। 

शिकायत या तनाव के माहौल में खाया गया भोजन स्वास्थ्यवर्धक न होकर गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को जन्म देता है। जरा सोचें, क्या आप अपने पति की ऐसी हालत करना चाहेंगी? यदि नहीं, तो उन्हें शांति से खाना परोसें और खाने का आनंद लेने दें। अपने मन की बातें करने के लिए दूसरा समय तय करें। बेहतर होगा कि खाने के बाद दोनों एक वॉक पर निकल जाएं और आपस में दिनभर की बातें शेयर करें।

इमोशनल ब्लैकमेलिंग 

सुमन और रवि हनीमून पर केरल घूमने गए।वहां बाजार में घूमते हुए सुमन की नजर साड़ियों पर ठहर गई और वह एक साड़ी लेने की जिद करने लगी।रवि ने उसे समझाया, “अभी तो शादी में इतने नए कपड़े और साडि़यां ली गई हैं।एक और साड़ी की क्या जरूरत है?” मगर सुमन जिद पर अड़ गई। साड़ी बहुत महंगी थी, इसलिए रवि भी नहीं माना।इसी बात पर सुमन मुंह फुलाकर बैठ गई और हनीमून पर ही दोनों में तनाव पैदा हो गया। रवि ने अपने एक दोस्त को फोन किया,तो उसने समझाया,”एक साड़ी के पीछे क्यों अपना हनीमून बर्बाद कर रहे हो, उसे दिला दो।” अंततः हार मानकर रवि ने सुमन को साड़ी दिला दी, जिससे सुमन खुश हो गई। मगर इस घटना के कारण रिश्ते के आरंभ में ही रवि का मन बुझ गया और उसके दिल में सुमन के प्रति इज्जत खत्म हो गई।

इमोशनल ब्लैकमेलिंग को हथियार की तरह इस्तेमाल कर अपने मन की मनवाने में तो स्त्रियों की कुशलता जगजाहिर है।कभी आंसुओं का सैलाब लाकर तो कभी मीठी बातों से, कभी उग्र तेवर से तो कभी बहला-फुसलाकर,वे अपनी बात मनवाकर ही दम लेती हैं। ऐसी स्त्रियां भले ही अपने मन की बात मनवा लें,मगर पति के दिल में अपने लिए प्रेम और विश्वसनीयता खो देती हैं। रानी कैकई इसका सबसे सटीक उदाहरण हैं। यदि आप में भी यह आदत है, तो इसे आज ही खत्म करने की शुरुआत कीजिए।

दूसरों से तुलना करना 

कुछ पत्नियों की आदत होती है कि अगर उनका पति उनकी अपेक्षा अनुसार व्यवहार नहीं कर रहा है, तो वे उसके सामने ही उसकी तुलना दूसरों के पतियों से करने लगती हैं। जैसे ‘फलां तो अपनी
बीवी को हर संडे बाहर घुमाने ले जाता है और एक आप हैं। अमुक का पति अपनी पत्नी को हर विशेष, अवसर पर महंगे गिफ्ट देता है, उससे कुछ सीखिए।’ ऐसी तुलना से पति के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है और पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आती है। तुलना रिश्तों के लिए जहर समान है, अतः ऐसा कभी नहीं करें।

आपसी बातें मायके में न बताएं 

पति-पत्नी को दो नहीं, बल्कि एक इकाई माना गया है। इन दोनों के बीच आया प्रत्येक इंसान ‘तीसरा’ ही कहा जाएगा, भले ही वह उनके बच्चें हों, माता-पिता हों या भाई-बहन हों…। दोनों में बहुत-सी ऐसी आपसी बातें होती हैं, जिनका किसी तीसरे से जिक्र करना बिल्कुल उचित नहीं होता। ऐसा करना रिश्ते की विश्वसनीयता को खतरे में डालता है। सीधे शब्दों में कहा जाए, तो पति-पत्नी की आपसी बातें बाहर नहीं जानी चाहिए। मगर कुछ लड़कियां अपनी मां, भाभी या किसी सहेली से इमोशनली इतनी जुड़ी होती हैं कि वे हर आपसी बात उनसे शेयर कर डालती हैं। पति को इस बात का तब अहसास होता है, जब बातों-बातों में या हाव-भाव से वे बातें बाहरवालों से निकलकर आती हैं। पत्नी की ऐसी हरकत से पति का उस पर से विश्वास उठ जाता है और वह अपनी गोपनीय और महत्वपूर्ण बातें पत्नी से शेयर करना बंद कर देता है।

मगर अपने पूर्व व्यवहार को देखे बिना पत्नी शिकायतें करती हैं, ‘ये तो हमें कुछ बताते ही नहीं, इन्होंने कभी हमें अपना समझा ही नहीं’ अब आप ही बताइए अविश्वास के बीज पहले किसने बोए? अब जिसने बोए हैं, फसल भी उसे ही काटनी पड़ेगी। ‘आपसी विश्वास’ दांपत्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और जरूरी गुण होता है। प्रेम के धागे की तरह ही विश्वास का धागा भी टूटने पर पुनः नहीं जुड़ पाता। अतः इसे सदा सलामत रखें।

‘तेरा-मेरा’ नहीं ‘हमारा’ 

आहना की कुशल से लव मैरिज हुई। दोनों एक-दूसरे को सालभर से डेट कर रहे थे। उनके बीच की कैमेस्ट्री इतनी अच्छी थी कि दोस्तों और परिवारजनों की नजरों में वे ‘परफेक्ट कपल’ थे। मगर शादी के बाद कुछ ऐसा हुआ जिसने कुशल के मन में आहना के प्रति संशय उत्पन्न कर दिए। वह सोचने पर मजबूर हो गया। क्या वाकई आहना शादी के लिए सही लड़की थी, कहीं उसके चुनाव में कोई गलती तो नहीं हो गई। बात यूं थी कि आहना को शादी के दौरान गिफ्ट में जो भी सामान और कैश मिला, वह उसने कुशल से शेयर नहीं किए। कुशल दोनों को मिले कैश और गिफ्ट को बैंक में रखना चाहता था, ताकि नई गृहस्थी जमाने में वे काम आ सकें।

मगर आहना ने उसके मुंह पर सीधे मना कर दिया, “देखो कुशल, ये पैसे मुझे मिले हैं, इसलिए मैं इन्हें अपनी मर्जी से, अपने ऊपर खर्च करूंगी।” यही नहीं, उसके पास गिफ्ट में एक स्मार्टफोन भी आया था। कुशल ने वह फोन अपने पिता को देना चाहा। वह बोला, “शादी की भागदौड़ में पापा का फोन गुम गया है, अगर मैं उन्हें नया खरीदकर दूंगा, तो 20-25 हजार का खर्चा होगा, तुम्हारें पास तो पहले से ही लेटेस्ट स्मार्टफोन है, तो इसे पापा को दे देते हैं।” मगर आहना अपना गिफ्ट देने को राजी नहीं हुई।

उसकी ऐसी प्रतिक्रिया देख कुशल समझ गया कि आहना इस शादी में पूरी तरह समर्पित नहीं है। उसे बहुत दुख हुआ और वह भी आहना के साथ ‘तेरा-मेरा’ वाला व्यवहार करने लगा, जिसका परिणाम यह हुआ कि ‘परफेक्ट कपल’ सालभर में ही ‘मिसमैच’ नजर आने लगा।

विवाह नामक रिश्ता तभी सार्थक होता है, जब उसमें एक ‘तू’ और एक ‘मैं’ बंधकर ‘हम’ हो जाते हैं। फिर उनमें कुछ ‘तेरा’ या ‘मेरा’ नहीं होता। जो होता है, ‘हमारा’ होता है। जिस विवाह में ऐसा नहीं होता, समझिए वह विवाह नहीं बस एक ‘गिव एंड टेक’ का एग्रीमेंट भर है। इस बात को समझते हुए निर्णय आपको करना है कि आपको अपने दांपत्य की नींव प्रेम, विश्वास और समर्पण पर रखनी है या ‘तेरे-मेरे’ की स्वार्थपूर्ण सोच पर।

इस लेख को पढ़कर यदि आपको लगता है कि जाने-अनजाने आप भी रिश्तों में गांठ डालने वाली ऐसी ही किसी गलत आदत की शिकार हैं, तो उठाइए समझ के झाड़ू को और साफकर दीजिए, ऐसी आदतों के जालों को जो आपके रिश्तों पर लगे हैं। अपने रिश्ते को सदैव खिले फूल-सा महकाते रहें।

इस लापरवाही की क्या जरूरत! 

आज मनीषा सुबह सही समय से नहीं उठ पाने के कारण अपने पति को टिफिन और ब्रेकफास्ट नहीं दे पाई, उसके सिर में भी बहुत दर्द था। फलस्वरूप पति बड़े खराब मूड से ऑफिस गया। वहीं, दूसरी ओर मनीषा उस पर अपनी खराब हालत के प्रति असंवेदनशील और रुखा होने का इलजाम लगाकर पूरा दिन घर में मुंह फुलाकर पड़ी रही। दोनों के बीच इस कारण दो दिन तक बोलचाल नहीं हुई। वास्तव में इस झगड़े के पीछे वजह कुछ और ही थी। यह जानते हुए भी कि उसे सोमवार सुबह जल्दी उठकर काम करने होते हैं। वह रविवार देर रात तक पिक्चर देखती रही और बहुत लेट सोई, जिससे सुबह उसकी आंख नहीं खुली। जबकि देव सुबह जल्दी ऑफिस होने के कारण पिक्चर बीच में ही छोड़कर समय से सोने चला गया था। जब हम गृहस्थी में कदम रखते हैं, तो हमारी अपने परिवार और पार्टनर के प्रति कुछ जिम्मेदारियां बनती हैं। उन जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही भी रिश्तों में गांठ बनाती हैं। अतः अपनी जिम्मेदारी समझें और उसे बखूबी निभाएं भी

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