जानिए जीन्स की खोज को लेकर रोचक कहानी, तो इसलिए जीन्स को बनाया गया था…

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अगर आपसे ये सवाल किया जाए कि ऐसे कौन से कपड़े हैं जो पहनना आपको बेहद पसंद है, जिन्हें लगभग हर मौके पर पहना जा सकता है और जो बहुत आरामदायक भी हैं. इस सवाल के जवाब में अधिकतर लोग जींस का नाम ही लेंगे. जी हां, डेनिम जिसे हम आम बोलचाल में जींस कहते हैं, और मज़ेदार बात ये कि चाहे लड़की हो या लड़का, चाहे किसी उम्र ये हों, ये सबके लिए समान रूप से आरामदायक और फैशनेबल रूप में उपलब्ध है.

आज मार्केट में जींस की इतनी वैरायटी, रंग और आकार प्रकार मौजूद है कि आप साल के 365 दिन अलग अलग तरह की जींस पहन सकते हैं. इतना ही नहीं, ये सिर्फ ट्राउज़र के रूप में ही नहीं बल्कि जैकेट, शर्ट, शार्ट्स, स्कर्ट यहां तक कि कुर्ते सहित और भी तमाम रूप में मौजूद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जींस को असल में मजदूरों के लिए बनाया गया था. चलिए आपको आज के इस सबसे फैशनेबल कपड़े का इतिहास के बारे में कुछ रोचक जानकारी देते हैं.

जींस की खोज का श्रेय लीवाइ स्ट्रॉस (Levi Strauss) को जाता है. उनकी कंपनी का नाम ‘Levi Strauss & Co.’ है, जिसकी जीन्स बहुत मशहूर है. लीवाइ स्ट्रॉस का जन्म 26 फरवरी 1829 को जर्मनी में हुआ था. 18 वर्ष की उम्र में वे अपनी माँ और बहनों के साथ न्यूयॉर्क चले आये और अपने बड़े भाई जोनस और लुइस के ड्राई-गुड्स के व्यवसाय ‘J. Strauss Brothers & Co.’ में हाथ बंटाने लगे.23 वर्ष की उम्र में वो सैन फ्रांसिस्को आ गए और ड्राई-गुड्स स्टोर की ब्रांच खोल ली.

लगभग 20 साल तक वे सैन फ्रांसिस्को में ड्राई-गुड्स का व्यवसाय करते रहे और एक व्यवसायी के साथ ही समाजसेवी के तौर पर भी अच्छा-खासा नाम कमा लिया. सैन फ्रांसिस्को में चाँदी की खदानें थी, जहाँ कई खनिक चाँदी खोजने का काम करते थे. वे खनिक अपने पेंट विशेषकर उसकी जेबों के फटने से परेशान थे. जेबों में चाँदी में ढेले रखने से वो जल्दी फट जाया करती थी इसलिये वे ऐसी पेंट चाहते थे, जो मजबूत होने के साथ-साथ सुविधाजनक हो और लंबे समय तक चल सके.

एक दिन अल्कली आइक नामक खनिक उस क्षेत्र के एक दर्जी जेकब डेविस के पास आया और अपनी समस्या बताते हुई उसका समाधान करने का निवेदन किया. जेकब डेविस ने इस समस्या को हल करने का एक उपाय खोज निकाला. उसने पेंट को मजबूती प्रदान करने के लिए उन जगहों पर तांबे के रिवेट लगा दिए जहाँ अधिक जोर पड़ता था,मसलन जेब के चारों कोनों और बटन फ्लाय पर. खनिक अल्कली आइक को यह रिवेट वाली पेंट बहुत पसंद आई. इसी बात से जेकब डेविस को मजबूत पैंट बनाने का आईडिया आया और वो इस प्रस्ताव को लेकर लीवाइ स्ट्रॉस के पास गया. वह उनसे उधार पर कपड़े लिया करता था, उसने लीवाइ स्ट्रॉस के सामने यह प्रस्ताव रखा कि अगर वह पेटेंट की फीस भर दे तो वे दोनों ही उस पेटेंट के आधे-आधे मालिक बन जायेंगे.

दूरदर्शी लीवाइ स्ट्रॉस को जेकब डेविस की इस खोज में भरपूर संभावना नज़र आई और वे तैयार हो गए. दोनों ने मिलकर पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया लेकिन पेटेंट मिलने में काफी देरी हो रही थी. इस देरी से परेशान होकर जेकब डेविस ने पेटेंट का अपना आधा हिस्सा भी लीवाइ स्ट्रॉस को बेच दिया. करीब दस माह बाद जब 20 मई 1873 को लीवाइ स्ट्रॉस को पेटेंट मिला,तो वे उस खोज के पूरी तरह मालिक बन गएजो असल में उन्होने की ही नहीं थी. पेटेंट मिलने के बाद उन्होंने रिवेट वाली पेंटों का व्यापक स्तर पर उत्पादन प्रारम्भ किया. 1960 तक इसे “waist overalls” या सिर्फ “overalls” कहा जाता था. इसकी कीमत 22 सेंट रखी और इसका प्रचार करने के लिए विज्ञापन भी निकाले. विज्ञापन में बताया गया कि यह कपड़ा खासतौर से किसानों,मैकेनिकों, मजदूरों, खनिकों के लिये बनाया गया. इसकी मजबूती की गारंटी दी गई और कहा गया कि इसके फटने पर एक नई जींस मुफ्त दी जायेगी.

जींस को खींचने वाले दो घोड़े लीवाइस जींस का ट्रेडमार्क बन गए.जैसे ही मार्केट में ये नया उत्पाद आया, इसने लोकप्रियता के रिकार्ड बना डाले. पेटेंट के कारण अगले 20 साल तक रिवेट वाली जींस पर लीवाइ स्ट्रॉस का एकाधिकार रहा. लगातार बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए निर्माण के लिए कई फैक्ट्रियां खोली गई. 1890 में लीवाइ स्ट्रॉस ने ‘लीवाइ स्ट्रॉस एंड कंपनी’ स्थापित की. इस जींस की बदौलत लीवाइ स्ट्रॉस अकूत संपत्ति के मालिक बन गए साथ ही लीवाइ स्ट्रॉस “जीन्स क्रांति के जनक भी कहलाए.तो ये है आपकी पसंदीदा जींस की कहानी, कैसे मज़दूरों किसानों के लिए इजाद की गई जींस आज आम आदमी से लेकर सेलेब्रिटी तक की फेवरेट बन गई है. दुनिया के हर कोने में जींस पहनी जाती है और इसकी सैंकड़ों वैरायटी मौजूद है. तो अब जब आप अगली बार अपनी जींस पहनें तो एक बार उसके रोचक इतिहास को ज़रूर याद कीजियेगा.

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