नदी क्‍या सूखी, इस देश की पूरी अर्थव्‍यवस्‍था ही चरमरा गई

कैप्टन रोबर्टो गॉन्ज़ालेज़ बीते 25 सालों से जहाज़ चला रहे हैं लेकिन उन्होंने अपने जीवन में ऐसा नज़ारा आज तक नहीं देखा. रात को उन्हें पराग्वे नदी के पास ‘टिमटिमाती लाल बत्तियां’ दिखीं.
उन्होंने जहाज़ के अपने सभी साथियों को आगाह किया क्योंकि वो लंगर डालने की तैयारी कर रहे थे. नदी के पास टिमटिमाती लाल बत्तियां उन मगरमच्छ की आंखें थीं जो रात को रोशनी पड़ने पर लाल रंग की दिख रही थीं.
उन्होंने बताया, “इससे पहले मैंने ऐसा नजारा कभी नहीं देखा था. लेकिन अब उनके रहने के ठिकाने सूख गए हैं और ये जानवर अब पानी के बाहर आ गए हैं.”
कैप्टन गॉन्ज़ालेज़ का इशारा हाल के वक़्त में भयंकर सूखे से था जिससे पराग्वे नदी बुरी तरह प्रभावित हुई थी.
आठ महीनों के सूखे के बाद इस नदी के जलस्तर में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई. अक्तूबर के आख़िर तक नदी का जलस्तर इतना कम हो गया जितना नदी के रिकॉर्डेड इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था.
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा द्वारा जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया कि तीन साल पहले की तुलना में राजधानी असुनशियोन के नज़दीक से गुज़रने वाली पराग्वे नदी के आसपास का इलाक़ा कितना अधिक सूख गया है.
पराग्वे के लिए ये परेशान करने वाली ख़बर थी. ये नदी देश के लिए कितनी अहम है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश का नाम, नदी के ही नाम पर है. इस नदी को देश की लाइफ़लाइन यानी जीवनरेखा माना जाता है.
पराग्वे के नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ नैविगेशन एंड पोर्ट्स (एएनपीपी) के अनुसार 25 अक्तूबर को असुनशियोन में नदी का जलस्तर सामान्य से 54 सेंटीमीटर तक कम था.
थोड़ी बारिश के बाद नौ नवंबर को नदी का जलस्तर थोड़ा बेहतर हुआ और ये सामान्य से केवल 14 सेंटीमीटर नीचे तक पहुँचा लेकिन एएनपीपी के निदेशक लुईस हारा इस स्थिति को चिंताजनक बताते हैं. वो कहते हैं कि हाल में नदी के जलस्तर में जो बढ़त दर्ज की गई है वो स्थायी नहीं है.
स्थानीय टेलीविज़न चैनल एबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “जितनी बारिश हुई है उसके बाद साल के आख़िरी महीनों में नदी में कितना पानी रहेगा इसे लेकर हम कुछ कड़वे आंकड़े देख रहे हैं.”
इस साक्षात्कार के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि नदी में जलस्तर जल्दी नहीं बढ़ने वाला है और हो सकता है कि अगले साल जनवरी या फ़रवरी में ही नदी में सामान्य जलस्तर हो सके और नदी जहाज़ों के लिए तैयार हो सके.
हारा करते हैं, “लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि नदी का पानी फिर से कम नहीं होगा. हमें बारिश की सख़्त ज़रूरत है.”
पराग्वे के मौसम विभाग के निदेशक राउल रोडोस ने बीबीसी को बताया कि साल के इस वक़्त नदी का जलस्तर कम से कम 2.5 मीटर तक होना चाहिए.
पराग्वे की लाइफ़लाइन है पराग्वे नदी
पराग्वे चारों तरफ़ से ज़मीन से घिरा देश है, इसके एक तरफ़ बोलिविया और अर्जेन्टीना हैं, तो दूसरी तरफ़ ब्राज़ील और नीचे उरुग्वे हैं.
पानी के लिए ये दक्षिण अमेरिकी देश पूरी तरह से पराग्वे नदी पर निर्भर है. इसी कारण इस नदी को देश की जीवनदायिनी यानी लाइफ़लाइन कहा जाता है.
पराग्वे के डिप्टी वाणिज्य मंत्री पेद्रो मानसुलो ने बताया, “हमारे लिए पराग्वे वो एकमात्र सड़क है जो हमें समंदर तक पहुँचाती है और सूखे के कारण ये सड़क अब मुश्किल में है.”
वो बताते हैं कि कुछ जगहों पर ये नदी इस क़दर सूख गई है कि बड़े कॉमर्शियल जहाज़ अब चलाए नहीं जा सकते.
देश के लोक निर्माण और संचार मंत्रालय में निदेशक के पद पर काम करने वाले जॉर्ज वेर्गारा कहते हैं, “अगर इस मुश्किल परिस्थिति का कोई हल न तलाशा गया तो नदी पर जहाज़ों का चलना असंभव हो जाएगा. हमारा आंकलन है कि क़रीब एक महीने में हम विकट परिस्थिति का सामना कर सकते हैं.”
वो कहते हैं कि नदी का पानी सूखने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर हो रहा है.
वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2019 में देश में आयात किए हुए सामान का 52 फ़ीसद हिस्सा और निर्यात किए हुए सामान का 73 फ़ीसद नदी के रास्ते ही लाया और ले जाया गया था.
पराग्वे दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पाद निर्यातकों में शुमार है. ये देश बड़ी संख्या में सोयाबीन का निर्यात करता है और इसके पास नदी पर चलाया जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ी बेड़ा है.
वेटलैंड्स में सूखा
पराग्वे में जलसंकट की समस्या सीधे तौर पर हाल में पेन्टानल में हुई कम बारिश से जुड़ी है. पेन्टानल दुनिया की सबसे बड़ी उष्णकटिबंधीय आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) है जो ब्राज़ील, बोलिविया और पराग्वे के विशाल इलाक़ों में फैली हुई है.
बारिश के दौरान पेन्टानल में जो पानी एकत्र होता है वो पराग्वे नदी में आता है. बीते कुछ महीनों में पेन्टानल में बारिश कम हुई और ये इलाक़ा जंगली आग के चपेट में आ गया.
वेटलैंड्स के इलाक़े में सूखा पड़ना कोई नई बात नहीं है लेकिन डर जताया जा रहा है कि आने वाले वक़्त में जलवायु परिवर्तन और इंसान की हरकतों के कारण इसकी तीव्रता में इज़ाफ़ा हो सकता है.
चिंता का एक और महत्वपूर्ण विषय अमेज़न के जंगलों की कटाई का भी है जिसका असर अमेज़न बेसिन से होने वाले जलवाष्प पर पड़ता है. यहां से होने वाला जलवाष्प दक्षिण अमेरिका के देशों तक पहुँचता है.
इस इलाक़े पर स्पेशलाइज़ेशन कर चुके ब्राज़ील के भूगोलवेत्ता मार्कोस रोज़ा ने बताया, “डर इस बात का है कि ये अब ‘न्यू नॉर्मल’ है यानी नई बात है जो जल्द नहीं बदलेगी. सालों से किए हम इंसानों के कामों का अब ये नतीजा है कि बारिश के साइकिल में बदलाव हुआ है, सूखा आ रहा है और पेन्टानल में प्राकृतिक बाढ़ आ रही है.”
साथ ही दक्षिण अमेरिका के जलवायु में एक अलग तरह का मौसमी परिवर्तन भी देखा जा रहा है जिसे ला नीना कहते हैं. जानकार मानते हैं कि इसने स्थिति को और गंभीर कर दिया है.
ला नीना एक प्रक्रिया है जिसमें भूमध्यरेखा के आसपास प्रशांत महासागर का पानी समय-समय पर ठंडा होने लगता है. इसके कारण मौसम ठंडा और शुष्क होने लगता है.
जब बिना लंगर रुके जहाज़
पराग्वे नदी में कम पानी होने के कारण कई जहाज़ों ने काम शुरू करने का अपना इरादा बदल कर अपने लंगर डाल दिए हैं. असुनशियोन में मौजूद पराग्वे के मुख्य बंदरगाह से कई जहाज़ अब पहले से कम सामान लेकर निकल रहे हैं.
आयात-निर्यात जारी रखने के लिए सरकार ने नदी का रास्ता अपनाने की बजाय सड़क मार्ग से समंदर तक पहुँचने का समाधान खोजा है. लेकिन नदी की तुलना में सड़क मार्ग से सामान लाने-ले जाने का ख़र्च कहीं अधिक है. बीच में ऐसा वक़्त भी आया जब जहाज़ों के लिए आगे बढ़ने का काई रास्ता ही नहीं बचा.
एक शिपिंग कंपनी के निदेशक गुलेरमो एरेके कहते हैं कि अक्तूबर के आख़िरी सप्ताह में उनके एक चौथाई जहाज़ों को लंगर डाल कर खड़े होना पड़ा था. उनके पास कुल 80 जहाज़ों का बेड़ा है.
वो कहते हैं, “हमारे आठ जहाज़ बोलिविया में फंसे थे, तीन पराग्वे के सैन एंटोनियो में और 12 जहाज़ों को अर्जेंटीना के सैन लोरेन्ज़ो में खड़ा होना पड़ा था. तकनीकी तौर पर वो फंसे नहीं थे लेकिन पानी कम होने से उन्हें चलाना असंभव था.”
गुलेरमो कहते हैं कि नदी में पानी कम होने का असर उनकी कंपनी के राजस्व पर पड़ा. उनकी कंपनी को हर महीने लगभग 40 लाख डॉलर का नुक़सान हुआ.
सेंटर फ़ॉर रिवर एंड मैरीटाइम शिप ओनर्स के जारी आंकड़ों की मानें तो पराग्वे के निजी सेक्टर को इस कारण 25 करोड़ डॉलर का नुक़सान हुआ है.
इस स्थिति से निपटने के लिए नदी को कई अहम जगहों पर और गहरा किए जाने की ज़रूरत है, लेकिन इस दिशा में अब तक काम शुरू नहीं हो सका है.
जॉर्ज वेर्गारा कहते हैं कि इस काम के लिए पहले बजट का आवंटन हो गया था लेकिन कोरोना महामारी के कारण सरकार को इसका पैसा डाइवर्ट कर महामारी से निपटने में लगाना पड़ा है.
वो अनुमान लगाते हैं कि नदी के तल को और गहरा करने का काम इस साल दिसंबर से शुरू होगा. हालांकि वो मानते हैं तब तक का वक़्त “बेहद जटिल मुश्किलों से भरा है.”
पीने के पानी की कमी
बात केवल जहाज़ों के चलने की नहीं है बल्कि पानी की कमी के कारण पराग्वे के नागरिकों के घरों में भी पीने के पानी की सप्लाई बाधित हुई है.
इस साल की शुरुआत में सरकार ने नदी का पानी जलसंकट से जूझ रहे चाको इलाक़े में लाने की योजना का उद्घाटन किया था. इस योजना के तहत पराग्वे नदी का पानी असुनशियोन से 650 किलोमीटर दूर प्यूर्टे कसाडो में लोगों के घर तक पहुँचाया जा रहा था.
लेकिन नदी के कैचमेन्ट एरिया में पानी न होने के कारण अक्तूबर में पानी यहीं नहीं पहुँच रहा है. यहां तक कि असुनशियोन में पानी की सप्लाई बाधित हो रही है.
पराग्वे नदी के किनारों में रहने वाले समुदायों के लिए इस नदी का विशेष महत्व है. इन समुदाय के लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों और सप्लाई के लिए नदी पर निर्भर हैं. डिप्टी वाणिज्य मंत्री मानसुलो ने बार-बार जलवायु, प्रकृति और अर्थव्यवस्था के बीच के संबंध पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा, “हमें पर्यावरण और विकास के बीच ज़रूरी सामंजस्य बनाए रखने की ज़रूरत है. प्रकृति हमें बार-बार संकेत दे रही है.”
वहीं पराग्वे मौसम विभाग के निदेशक राउल रोडोस कहते हैं सूखे के नदी पर हो रहे असर को समझने के लिए जलवायु परिवर्तन के संभावित असर के बारे में और शोध किए जाने की ज़रूरत है.
वो कहते हैं, “हमें इसका विश्लेषण करना होगा कि क्या सूखा बार-बार आ रहा है और ऐसा है तो क्या इसमें तेज़ी है. हमें ये पता है कि बाढ़ अब बार-बार आने लगी है.”
-BBC

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